Online सखी

मनोरंजन

Add1

LightBlog

Breaking

Wednesday, 17 June 2020

11:42

कन्या भ्रूण हत्या/ बेटी बचाओ बेटी बचाओ

Kannya bhrun hatya/bete bachaao



                                 कविता 


बेटी- तुम कौन हो मेरी?
        मैं कौन हूं तुम्हारी?
        इतना बतलाओ ना
       मैं कहां हूं?
        किस जगह हूं?                               
       इतना समझाओ ना,
       मैं छू  सकती हूं तुमको
       मैं सुन सकती हूं तुमको
      पर देख नहीं सकती क्यों?
       यह भी बतलाओ ना

माँ- मैं जननी हूं तेरी तू बेटी है मेरी
      तू गर्भ में मेरे पलती और
     मैं हूं तेरी मां

बेटी- मां कितना सुंदर नाम तुम्हारा
    और मेरा नाम है बेटी तुम
    जैसे सूरज और मैं
    रौशनी कब देखूंगी तुमको
    यह बतलाओ माँ?
माँ-  9 माह पलेगी  गर्भ में मेरे
   फिर जन्म दूंगी मैं तुझको
    तब देखेगी तू मुझको
   और मैं देखूंगी तुझको
    पर डर लगता है मुझको
    कहीं ऐसा ना हो जाए
    मैं खुद हूं तुझको या
    तू मुझसे खो जाए!

बेटी- ऐसा क्यों कहती हो मां?
        ऐसा क्या होगा?
        एक माँ से उसकी बेटी
        को कौन भला छीनेगा?
माँ-   किसको औरत प्यारी है
        हो बेटी या बहना
        बेटा सबको प्यारा है मेरी बेटी
        क्योंकि बेटी तो है पराया धन
बेटी-  रो मत माँ मुझे तुमसे
        नहीं कोई गिला
        और ना ही कोई शिकवा अबकी
        कहूंगी उस बनाने वाले
       ईश्वर से
       अगले जन्म मुझे
       बेटी ना बनाना
      मुझे बेटी ना बनाना
       माँ मेरी प्यारी माँ।         

Thursday, 4 June 2020

17:07

माँ प्यारी माँ


माँ  प्यारी माँ  के लिये एक छोटी सी कविता 



                                माँ  प्यारी माँ 


मां तू ममता का सागर है
तेरा प्यार है मां अमृत
जिस जगह पर भी देखूं मैं 

देखे तुझको मेरा चित्
 मां तूने रूप लिए कितने
पहले बनी तो देती और बनी फिर बहना
 तेरी प्रेम और वात्सल्य का मेरी मां क्या कहना
जननी तू धरणी तू तू ही है पालन करता
तेरे आँचल की छाँव तले हर जीवन है पलता
बिन पानी के मछली जैसे मैं तेरे बिन थी तड़पी
जल के बिन प्यासी धरती जेसे मै बिल्कुल वेसे तरसी
क्या है तुझ मे  ऐसा तुझे छोड़ कहीं ना जाऊं तेरी इन पावन चरणों में मेरी मां मैं सारा जीवन बिताऊँ
माँ मेरी प्यारी माँ ।
माँ के लिये छोटी सी कविता 


Wednesday, 3 June 2020

14:13

नारी सप्त रंग तेरा


नारी सप्त रंग तेरा



                             कविता

अपनी ममता का आंचल मुझ पर डाल दे तू  अपने चाहत का सागर मुझ पर उड़ेल दे तू                    बनके प्यारी सी बहना रक्षा का वचन ले तू,
प्यारी नन्ही सी बिटिया बन कर
मेरी कुटिया संवार दे तू,
बनके हमराज़ मेरी दोस्त मेरी जिंदगी में आ तू
बनके अर्धांगिनी मेरी मेरे जीवन में प्यार भर दे तू
ऐ नारी तेरा जीवन सतरंगी हैं
अपने रंगों से मेरी दुनिया रंगीन बना दे तू                   हे नारी अपनेेे नारीत्व से सबके जीवन की बगिया  महका दे तू

यह कविता संसार की

प्रत्येक नारी को समर्पित