मां तू ममता का सागर है तेरा प्यार है मां अमृत जिस जगह पर भी देखूं मैं
देखे तुझको मेरा चित् मां तूने रूप लिए कितने पहले बनी तो देती और बनी फिर बहना तेरी प्रेम और वात्सल्य का मेरी मां क्या कहना जननी तू धरणी तू तू ही है पालन करता तेरे आँचल की छाँव तले हर जीवन है पलता बिन पानी के मछली जैसे मैं तेरे बिन थी तड़पी जल के बिन प्यासी धरती जेसे मै बिल्कुल वेसे तरसी क्या है तुझ मे ऐसा तुझे छोड़ कहीं ना जाऊं तेरी इन पावन चरणों में मेरी मां मैं सारा जीवन बिताऊँ माँ मेरी प्यारी माँ । माँ के लिये छोटी सी कविता
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