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Wednesday, 17 June 2020

कन्या भ्रूण हत्या/ बेटी बचाओ बेटी बचाओ

Kannya bhrun hatya/bete bachaao



                                 कविता 


बेटी- तुम कौन हो मेरी?
        मैं कौन हूं तुम्हारी?
        इतना बतलाओ ना
       मैं कहां हूं?
        किस जगह हूं?                               
       इतना समझाओ ना,
       मैं छू  सकती हूं तुमको
       मैं सुन सकती हूं तुमको
      पर देख नहीं सकती क्यों?
       यह भी बतलाओ ना

माँ- मैं जननी हूं तेरी तू बेटी है मेरी
      तू गर्भ में मेरे पलती और
     मैं हूं तेरी मां

बेटी- मां कितना सुंदर नाम तुम्हारा
    और मेरा नाम है बेटी तुम
    जैसे सूरज और मैं
    रौशनी कब देखूंगी तुमको
    यह बतलाओ माँ?
माँ-  9 माह पलेगी  गर्भ में मेरे
   फिर जन्म दूंगी मैं तुझको
    तब देखेगी तू मुझको
   और मैं देखूंगी तुझको
    पर डर लगता है मुझको
    कहीं ऐसा ना हो जाए
    मैं खुद हूं तुझको या
    तू मुझसे खो जाए!

बेटी- ऐसा क्यों कहती हो मां?
        ऐसा क्या होगा?
        एक माँ से उसकी बेटी
        को कौन भला छीनेगा?
माँ-   किसको औरत प्यारी है
        हो बेटी या बहना
        बेटा सबको प्यारा है मेरी बेटी
        क्योंकि बेटी तो है पराया धन
बेटी-  रो मत माँ मुझे तुमसे
        नहीं कोई गिला
        और ना ही कोई शिकवा अबकी
        कहूंगी उस बनाने वाले
       ईश्वर से
       अगले जन्म मुझे
       बेटी ना बनाना
      मुझे बेटी ना बनाना
       माँ मेरी प्यारी माँ।         

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